Published on: 14 May 2026
*वाणिज्य विभाग द्वारा "म्यूचुअल फंड जागरूकता और निवेश नियोजन" विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन।*
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर के वाणिज्य विभाग द्वारा "म्यूचुअल फंड जागरूकता और निवेश नियोजन" विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शैक्षणिक संकाय और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को वित्तीय प्रबंधन के गुर सिखाए गए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रविंद्र ने कहा कि वाणिज्य विभाग का लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने जोर दिया कि वित्तीय साक्षरता वह कवच है जो भविष्य की अनिश्चितताओं से सुरक्षा प्रदान करता है।
प्रोफेसर अदिति शर्मा (डीन, वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय) ने शोधार्थियों और स्टाफ को संबोधित करते हुए कहा कि सही समय पर लिया गया निवेश का निर्णय ही भविष्य की असली पूंजी है।
मुख्य वक्ता श्री विपिन शर्मा (मुख्य प्रबंधक, एचडीएफसी एएमसी) ने म्यूचुअल फंड और निवेश के तकनीकी व व्यावहारिक पहलुओं और निवेश नियोजन पर चर्चा करते हुए, एक बहुत ही सरल उदाहरण देते हुए बताया कि यदि कोई व्यक्ति अपनी जीवनशैली में छोटा सा बदलाव करे और अनावश्यक खर्च को कम करे, तो साल के मात्र ₹18,000 की बचत की जा सकती है। यदि इस राशि को म्यूचुअल फंड में 12% की अनुमानित दर से निवेश किया जाए, तो 35 वर्षों में यह राशि ₹87,02,336 (सतासी लाख दो हजार तीन सौ छत्तीस रुपये) का विशाल फंड बन सकती है.
उन्होंने श्रोताओं को सचेत किया कि केवल पैसा बचाना काफी नहीं है। महंगाई हर साल आपके पैसे की क्रय शक्ति को कम कर रही है। निवेश ऐसा होना चाहिए जो महंगाई दर से अधिक रिटर्न दे सके, ताकि भविष्य में आपकी जरूरतों को पूरा किया जा सके।
निवेश में जोखिम को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि म्यूचुअल फंड में निवेश का जोखिम 'एसेट एलोकेशन' और 'डायवर्सिफिकेशन' के माध्यम से प्रबंधित किया जाता है। अलग-अलग प्रकार के फंड्स में पैसा लगाकर हम अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित बना सकते हैं।
उन्होंने विभिन्न प्रकार के फंड्स (जैसे इक्विटी, डेट और हाइब्रिड फंड्स) के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निवेशकों को अपनी उम्र, लक्ष्य और जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार ही सही फंड का चुनाव करना चाहिए।
उन्होंने सभी शोधार्थियों और कर्मचारियों को सलाह दी कि वे बाजार की अस्थिरता से घबराए बिना लंबे समय तक निवेशित रहें।
सीए भारत जैन एवं सीए राहुल सिंघल: इन विशेषज्ञों ने 'वित्तीय अनुशासन' और 'पावर ऑफ कंपाउंडिंग' पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद निरंतरता से बड़ा लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम का ऊर्जावान संचालन सीए (डॉ.) संदीप कुमार पुरवा द्वारा किया गया।
अंत में, प्रोफेसर दीपक गुप्ता ने मुख्य वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रशासन और सभी प्रतिभागियों का इस सफल और अनिवार्य ज्ञानवर्धक सत्र का हिस्सा बनने के लिए औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी श्री अनिल , प्रोफेसर संजय हुड्डा, प्रोफेसर तेज सिंह, डॉ. ईश्वर शर्मा, डॉ. ममता अग्रवाल और डॉ. मीरा भांभा विशेष रूप से उपस्थित रहे। इनके साथ ही विभाग के प्राध्यापक डॉ. सुनीता यादव, डॉ. मंजीत शर्मा, डॉ. संदीप यादव, डॉ. अनिता, डॉ. प्रियंका रंगा और डॉ. सरला ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शोधार्थी, गैर-शिक्षण कर्मचारी और विद्यार्थी भारी संख्या में इस ज्ञानवर्धक सत्र का हिस्सा बने।